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अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) क्या है? महत्व, कथा, नियम और लाभ – पूर्ण जानकारी


प्रस्तावना

हिंदू धर्म में समय-समय पर कई विशेष मास और पर्व आते हैं, जिनका अपना आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है। उन्हीं में से एक है अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह मास अत्यंत पवित्र माना जाता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।

आज के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि अधिक मास क्या होता है, यह क्यों आता है, इसका महत्व क्या है और इस दौरान क्या करना चाहिए।


अधिक मास क्या है?

अधिक मास वह अतिरिक्त महीना है जो हिंदू पंचांग में लगभग हर 3 साल में एक बार आता है। इसे अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार Leap Month भी कहा जा सकता है।

हिंदू पंचांग चंद्रमा (Lunar Calendar) पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष (Solar Year) 365 दिनों का होता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। इस प्रकार हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 32 महीने 16 दिन बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं।


अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई देवता स्वामी नहीं बना, तब भगवान विष्णु ने इसे स्वीकार किया। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा, क्योंकि भगवान विष्णु को “पुरुषोत्तम” कहा जाता है।

इस कारण यह महीना भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का समय माना जाता है।


अधिक मास का धार्मिक महत्व

1. भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति

इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। उनके नाम का जप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

2. पापों से मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास में किए गए पुण्य कार्यों से पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो सकते हैं।

3. मोक्ष की प्राप्ति

यह महीना आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान भक्ति करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

4. कई गुना फल

जो भी दान, पूजा या व्रत इस महीने में किया जाता है, उसका फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।


अधिक मास की पौराणिक कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, अधिक मास को अन्य महीनों की तरह कोई मान्यता नहीं मिल रही थी। वह स्वयं को तिरस्कृत महसूस कर रहा था। तब उसने भगवान विष्णु की शरण ली।

भगवान विष्णु ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा कि अब से यह महीना मेरा होगा और इसे “पुरुषोत्तम मास” के नाम से जाना जाएगा। जो भी इस महीने में पूजा करेगा, उसे विशेष फल मिलेगा।


अधिक मास में क्या करना चाहिए?

1. भगवान विष्णु की पूजा

प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

2. व्रत और उपवास

इस महीने में व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेषकर एकादशी व्रत का पालन करें।

3. धार्मिक ग्रंथों का पाठ

  • श्रीमद्भागवत गीता
  • विष्णु सहस्रनाम
  • रामचरितमानस

इनका पाठ करने से मन शुद्ध होता है।

4. दान पुण्य

गरीबों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करें। यह अत्यंत पुण्यदायक होता है।

5. तीर्थ यात्रा

यदि संभव हो तो गंगा स्नान या तीर्थ यात्रा करें।


अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?

1. शुभ कार्यों से बचें

इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

2. झूठ और क्रोध से दूर रहें

इस दौरान मन और वाणी को शुद्ध रखना चाहिए।

3. मांस और शराब का सेवन न करें

सात्विक जीवन अपनाना चाहिए।


अधिक मास के व्रत और नियम

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें
  • स्नान कर पूजा करें
  • भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें
  • पीले वस्त्र धारण करें
  • सात्विक भोजन करें
  • दिन में एक समय भोजन करें

अधिक मास में विशेष उपाय

1. तुलसी पूजा

तुलसी के पौधे की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

2. दीपदान

प्रतिदिन शाम को दीप जलाएं।

3. गरीबों को भोजन कराना

यह सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना गया है।

4. मंत्र जाप

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें।


अधिक मास के लाभ

  • मानसिक शांति मिलती है
  • आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं
  • परिवार में सुख-शांति आती है
  • भगवान की कृपा प्राप्त होती है
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

अधिक मास केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह समय संतुलन के लिए आवश्यक है ताकि चंद्र और सौर कैलेंडर में सामंजस्य बना रहे।


अधिक मास और ज्योतिष

ज्योतिष के अनुसार, यह समय ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने का होता है। इस दौरान किए गए उपाय ग्रह दोष को कम करते हैं।


निष्कर्ष

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर है। इस महीने में किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो इस पवित्र मास का पूरा लाभ उठाएं और भक्ति भाव से भगवान की आराधना करें।


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